दोस्तों के साथ एसी मंज़िल से आए है
ऍसा लग रहा है कुचा-ए-कातिल से आए है
हॅरतज़दा चुपचाप हम कुछ भी न कह सके
दो बुन्द अश्क भी बड़ी मुशकिल से आए है
राह मे गम था खड़ा उस से ये केह दिया,
हम बुझ चुके चराग हैं महफिल से आए हैं
ऍसा लग रहा है कुचा-ए-कातिल से आए है
हॅरतज़दा चुपचाप हम कुछ भी न कह सके
दो बुन्द अश्क भी बड़ी मुशकिल से आए है
राह मे गम था खड़ा उस से ये केह दिया,
हम बुझ चुके चराग हैं महफिल से आए हैं
No comments:
Post a Comment